विराट कोहली के 100 शतक, नामुमकिन ख्वाब या मुमकिन हकीकत, क्या कहानी कहते हैं आंकड़े? | Virat Kohli 100 Hundreds a distant dream or possibility for Indian captain

विराट कोहली के 100 शतक, नामुमकिन ख्वाब या मुमकिन हकीकत, क्या कहानी कहते हैं आंकड़े?

विराट कोहली 100 शतक लगाने के सबसे तगड़े दावेदार हैं.

सुभायन चक्रवर्ती

विराट कोहली (Virat Kohli) और रिकॉर्ड एक दूसरे के पर्याय हैं. उनके रन बनाने की गति ने क्रिकेट में चौंकाने वाली ऊंचाई हासिल कर ली है. एक गोल-मटोल टीनेजर से क्रिकेट के ब्रांड एंबेसडर बने कोहली के लिए क्रिकेट करियर रनों, मैच जिताने वाली बैटिंग और सैकड़ों रिकॉर्ड से भरा है. कोहली ने कई रिकॉर्ड तोड़े हैं और कुछ में तो अपने आदर्श सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) को भी पीछे छोड़ चुके हैं. हालांकि 100 शतक के रिकॉर्ड से वो अभी कोसों दूर हैं. 71वें शतक के साथ वो रिकी पोंटिंग की दूसरी सबसे ज्यादा सेंचुरी के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगे. लेकिन विराट के लिए ये इंतजार काफी लंबा हो गया है. सचिन तेंदुलकर के उस इंतजार से भी लंबा जिसमें उन्हें 99 से 100 शतक तक पहुंचने में 369 दिन लग गए थे. कोहली 678 से ज्यादा दिनों से कोई सेंचुरी नहीं मार सके हैं.

350 टेस्ट और वन डे इंटरनेशनल में 70 अंतरराष्ट्रीय शतक का विराट कोहली का रिकॉर्ड लाजवाब है. उनकी कप्तानी और व्यक्तित्व को लेकर लोगों की राय बंटी हुई हो सकती है, लेकिन उनकी शानदार बल्लेबाजी पर किसी को कोई शक नहीं है. रन बनाने की इस भूख के कारण ही कोहली अकेले बैट्समैन हैं जिन्होंने क्रिकेट के हर फॉर्म में औसत 50 से ज्यादा रन बनाए हैं. टेस्ट में उनका औसत 51.9, वनडे में 59.07 और टी20 में 52.65 है. कोहली जल्द ही 33 साल के हो जाएंगे. और करियर के अंतिम दौर में उनकी रन बनाने की भूख निश्चित तौर पर और बढ़ गई होगी. अच्छी फिटनेस की वजह से कम से कम टेस्ट में उनका करियर लंबा होने की संभावना है. 2008 में दांबुला में 12 रन से करियर की शुरुआत करने वाले विराट कोहली भविष्य में कई रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं.

कोहली से नहीं बन पा रहा शतक

हाल के दिनों में वो अपने पूरे फॉर्म में नहीं हैं. जहां वो शतक नहीं बन पा रहे हैं, वहां खेल में उनके प्रदर्शन को लेकर भी चिंता जाहिर की जा रही हैं. लेकिन कोहली इस फेज से उबरने में पूरी तरह सक्षम हैं. और अक्टूबर 2021 से जून 2022 के बीच उन्हें अपने खेल को बेहतर करने और नए-नए रिकॉर्ड बनाकर करियर को नई ऊंचाई देने के खूब मौके मिलेंगे. क्योंकि इस दौरान क्रिकेट मैचों की झड़ी लगी होगी. तेजतर्रार भारतीय बैस्टमैन विराट कोहली ने 490 इनिंग में 23000 रन बना कर हाल ही में एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है. इस दौरान उन्होंने सचिन तेंदुलकर के 522 इनिंग में 23000 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. ये अंतर चौकाने वाले हैं.

सबसे तेज 23000 रन

• विराट कोहली – 490 पारी
• सचिन तेंदुलकर – 522 पारी
• रिकी पोंटिंग – 544
• जैक्स कैलिस – 551
• कुमार संगकारा – 568

कोहली ने ये रन 55 से ज्यादा की औसत से बनाए हैं – जो कि सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में सबसे बेहतर है. हालांकि सचिन तेंदुलकर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में टॉप पर बने हैं. उनके बाद कुमार संगकारा 28,016 और रिकी पोंटिंग 27,483 रनों के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं. कोहली का नंबर सातवां है. 100 शतक बनाने की भूख कोहली को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती रहेगी. सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड तक पहुंचना उनके लिए बड़ी चुनौती है मगर उनकी पहुंच से बाहर नहीं है. टीवी 9 ने यह जानने की कोशिश की कि दोबारा फॉर्म में आने के बाद कोहली कितने शतक बना सकते हैं. आम तौर पर एक एथलीट का परफॉर्मेंस उम्र के साथ घटता जाता है.

इस लिहाज से कोहली के मामले में अगर बेंचमार्क को करीब पचीस फीसदी कम कर आकलन करें, तो जहां 2017 और 2018 के बेस्ट परफॉर्मेंस में उन्होंने ने 11-11 सेंचुरी मारी, वहीं आने वाले सालों में वो कम से कम 8-8 सेंचुरी मार सकते हैं. ऐसे में अगर विराट कोहली अगले पांच साल और खेलते हैं तो 40 और सेंचुरी मार चुके होंगे यानी उनकी शतकों की कुल तादाद 110 तक पहुंच सकती है.

उम्र तो सिर्फ एक संख्या है

विराट कोहली में अब भी काफी क्रिकेट बचा है. कई लोग कह रहे हैं 33 साल के होने के बाद वो अपना फॉर्म खो देंगे. मगर उनसे पहले कई बैट्समैन ये साबित कर चुके हैं कि उम्र सिर्फ एक नंबर है. सचिन तेंदुलकर 30 साल के होने के बाद भी काफी अच्छा प्रदर्शन करते रहे. हालांकि टेस्ट में उनका औसत 30 की उम्र के बाद गिर गया मगर ODIऔर T20 में उनका औसत काफी अच्छा रहा. मास्टर ब्लास्टर ने करियर के अंतिम दिनों में भी टेस्ट और वन डे इंटरनेशनल में शतकों की झड़ी लगाए रखी. दिलचस्प बात है कि सचिन तेंदुलकर ने वन डे इंटरनेशनल में 30 साल के बाद की उम्र में और बेहतर प्रदर्शन किया. ना सिर्फ उन्होंने इस दौरान अपना औसत बेहतर किया, बल्कि ODI में अपना उच्चतम स्कोर 200 रन भी बनाया. भारत में उनके फैन आज भी उस क्षण को याद कर रोमांचित हो उठते हैं. तेंदुलकर के आंकड़ों को देखें तो लगता है कि ODI में बेस्ट माने जाने वाले विराट कोहली भी आने वाले समय में सफलता की सीढ़ियां चढ़ सकते हैं.

संगकारा हैं 30 प्लस के बेहतरीन उदाहरण

श्रीलंका के पूर्व कप्तान संगकारा सबसे बेहतर कीपर-बैट्समैन रहे हैं. 30 साल की उम्र तक तो वो टेस्ट और ओडीआई में बेहतर प्रदर्शन करते ही रहे, लेकिन 30 के बाद भी उनकी उप्लब्धियों में कोई कमी नहीं आई. बल्कि संगकारा ने 30 साल के बाद ही अपने करियर के शिखर को छुआ. जहां 30 साल के बाद उन्होंने 60 का औसत हासिल किया, 20 की उम्र में उनका औसत 54.37 था. 30 की उम्र के बाद उन्होंने टेस्ट में 20 साल की उम्र की तुलना में 10 सेंचुरी ज्यादा मारे. वनडे में उन्होंने 20 की तुलना में 30 की उम्र में 13 शतक अधिक जड़े.

गौर करने की बात ये है कि उन्होंने 30 की उम्र के बाद 20 की तुलना में कम इनिंग्स खेली. वहीं टेस्ट में 30 की उम्र के बाद उनका औसत 9.17 फीसदी बढ़ा जबकि वनडे में 30.17 फीसदी. ऐसे में संगकारा ‘उम्र बस एक संख्या है’ की सबसे बेहतरीन मिसाल हैं. अगर कोहली संगकारा की तरह खेलते हैं तो वो गेंदबाजों पर अब भी कहर ढा सकते हैं. संगकारा की तरह ब्रायन लारा ने भी 30 के बाद 20 की उम्र से बेहतर प्रदर्शन किया. उनका रिकॉर्ड 400 नॉट ऑउट का स्कोर भी 30 की उम्र के बाद ही आया.

लारा का कैसा रहा हाल

30 की उम्र के बाद वेस्ट इंडीज के पूर्व कप्तान के रन बनाने की गति और तेज हो गई. टेस्ट में लारा ने 30 साल की उम्र के बाद 53.66 औसत से रन बनाए जो 20 की उम्र में 51.60 थी. हालांकि उम्र बढ़ने पर उनके ODI करियर में गिरावट देखी गई. लारा ने 30 की उम्र के बाद 20 की उम्र की तुलना में ज्यादा शतक मारे. जब वेस्ट इंडीज की टीम संयुक्त रूप से संघर्ष कर रही थी, छोटे फॉर्मेट में लारा का प्रदर्शन 20 की उम्र के 42.38 की औसत से 30 में 36.18 पर आ गिरा. टेस्ट में लारा का बैटिंग औसत 30 की उम्र के बाद 3.91 फीसदी बढ़ा हालांकि वनडे में ये 15.78 फीसदी घट गया. उम्र 20 की हो या 30 की ब्रायन लारा गेंदबाजों के लिए हमेशा से काल बने रहे और क्रिकेट में एक महत्वपूर्ण अध्याय बने.

पोंटिंग टेस्ट में गिरे तो वनडे में बढ़े

रिकी पोंटिंग ने अपने करियर में एकरूपता बनाए रखी. टेस्ट हो या ODI, वर्ल्ड कप जिताने वाले ऑस्ट्रेलियाई कैप्टन अपनी टीम के लिए काफी महत्वपूर्ण रहे. दोनों ही फॉर्मेट में पोंटिंग ने गेंदबाजों के छक्के छुड़ा दिये. 30 की उम्र के बाद उनका टेस्ट औसत जरूर कम हुआ मगर वनडे में इसमें हल्की बढ़त देखी गई. 30 की उम्र के बाद भी पोंटिंग ने दोनों ही फॉर्मेट में अपना फॉर्म बरकरार रखा. टेस्ट में ये गिरावट 11.58 फीसदी रही जबकी ओडीआई में 0.519 की हल्की बढ़त थी. इससे भी जाहिर होता है कि उम्र बस एक संख्या है.

श्रीलंका के पूर्व कप्तान महेला जयवर्धने ने भी अपने पूरे करियर में एक जैसा फॉर्म बनाए रखा. टेस्ट हो या ODI, 20 की उम्र हो या 30 की, जयवर्धने एक जैसा खेलते रहे. साल 2000 हो या 2010, जयवर्धने टेस्ट में डबल सेंचुरी बनाने के अलावा ODI में भी टीम की रीढ़ बने रहे. 30 की उम्र में 51.63 का उनका औसत इस बात को झुठलाता है कि उम्र बढ़ने के बाद खिलाड़ी की खेलने की क्षमता कम हो जाती है. इन दिनों कोरोना के कारण अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कम खेला जा रहा है, जिससे आने वाले वक्त में मैच जल्दी-जल्दी कराए जा सकते हैं. ऐसे में कोहली के पास ना सिर्फ फॉर्म में वापस आने का वक्त है बल्कि अब तक के सर्वश्रेष्ठ बैट्समैन का ताज पहनने का मौका भी है. जैसा कि कहा जाता है कि फॉर्म अस्थाई होता है, लेकिन क्लास तो स्थाई होता है.

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