हेल्थगीरी अवॉर्ड्स में चुनी गईं हस्तियां ही न्यू इंडिया की असली चैंपियनः अरुण पुरी – Healthgiri Awards India Today Group Chairman and Editor in Chief Aroon Purie Speech NTC

इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित हेल्थगीरी अवॉर्ड्स को संबोधित किया. उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया का स्वागत करते हुए कोरोना महामारी, टीकाकरण अभियान समेत विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से बात की. पढ़ें, अरुण पुरी का पूरा भाषण…

माननीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया जी
आपका हार्दिक स्वागत है…
लेडीज एंड जेंटलमैन
आपका स्वागत है, वास्तव में, इंडिया टुडे सफाईगीरी अवॉर्ड्स के सातवें संस्करण में इस समय बाहर आने के लिए आपका दोहरा स्वागत है, जिसे पिछले साल से हमने हेल्थगीरी शिखर सम्मेलन और अवॉर्ड्स में बदल दिया है. चूंकि महामारी का प्रकोप अभी भी कायम है और यह साल भी मुश्किलों भरा रहा है, हम इसे हेल्थगीरी अवॉर्ड्स के रूप में जारी रख रहे हैं. 
2014 से इस अवॉर्ड्स सेरेमनी की मेजबानी करना एक सम्मान और सौभाग्य की बात है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया टुडे ग्रुप और मुझे स्वच्छ भारत के राजदूत के रूप में नॉमिनेट किया था. 
कल की ही बात है, माननीय प्रधानमंत्री जी ने स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन (SBMU) 2.0 और अटल मिशन फॉर रेजूवेंशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (AMRUT) 2.0 का शुभारंभ किया. 
SBMU 2.0 का उद्देश्य हमारे शहरों को कचरा मुक्त बनाना, सीवेज और सेप्टिक प्रबंधन में सुधार करना, हमारे शहरों को पानी से सुरक्षित बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि हमारी नदियों में किसी तरह का सीवेज बहकर न जाए.
ये बेहद ही प्रशंसनीय और बहुत जरूरी लक्ष्य हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा और मैं कोट करता हूं, “स्वच्छता एक जीवनशैली है, स्वच्छता जीवन का मंत्र है.” मेरा मानना है कि हम सभी को अपने देश की भलाई के लिए इस मंत्र पर समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए. 

जैसा कि हम इस स्वच्छता मिशन को जारी रखे हैं; हम इस तथ्य को नहीं भूल सकते कि कोविड -19 महामारी की काली छाया अभी भी हमारा पीछा कर रही है. 
ये महामारी वैश्विक स्तर पर बड़े पैमानों पर मौतों और दुखों का कारण बनी है.
हाल के इतिहास में ऐसा समय कभी नहीं आया जब इस कदर जीवन आजीविकाएं प्रभावित हुई हों. इस महामारी ने पिछले साल से अबतक दुनिया भर में 47 लाख से अधिक लोगों की जान ली है. अर्थव्यवस्थाओं को तबाह कर दिया गया है.
जो बच गए उन्हें अपने जीवन के हर क्षेत्र में अधिक से अधिक आर्थिक असुरक्षा, चिंता और व्यवधान का सामना करना पड़ा है. कई लोगों के लिए मानसिक और शारीरिक चुनौतियां बरकरार हैं.
अब तक, भारत में कोविड-19 के 33 मिलियन से अधिक मामले और 4,48,605 मौतें दर्ज की गई हैं. हम देश के स्तर पर कोरोना मामलों की संख्या में अमेरिका के बाद दूसरे और कुल मौतों की संख्या में तीसरे स्थान पर हैं.

हमने इस साल अप्रैल और मई के बीच कोविड -19 महामारी की विनाशकारी दूसरी लहर देखी, जिसमें एक दिन में 400,000 से अधिक केस रिकॉर्ड किए गए.
भारत की कुल कोविड डेथ में से आधी अकेले उन दो महीनों में हुईं. और मुझे विश्वास है कि यहां मौजूद हम में से हर कोई किसी न किसी तरह से इस हेल्थ इमरजेंसी से प्रभावित हुआ है.
सहज चलने वाला हमारा हेल्थ सिस्टम संक्रमित रोगियों की अभूतपूर्व संख्या से तेजी से प्रभावित हुआ. बीमार व्यक्तियों को अस्पतालों तक ले जाने के लिए पर्याप्त एम्बुलेंस नहीं थीं. ऑक्सीजन और अस्पताल में बेड की किल्लत हो गई थी और मरीजों को देखने के लिए मेडिकल स्टाफ की कमी हो गई थी. श्मशान भरे पड़े थे और, कई मामलों में, जहां पूरे परिवार कोविड पॉजिटिव थे वहां मृतकों का अंतिम संस्कार करने के लिए भी कोई नहीं था.

यह एक तरह का युद्ध था. और इससे मुकाबले के लिए योद्धाओं (warriors) के एक असाधारण समूह की जरूरत थी. देश भर में, हजारों समर्पित पुरुष, महिलाएं और संगठन; दोनों ही तरफ से सरकार में और निजी क्षेत्रों में, हमारे कोरोना योद्धा थे जिन्होंने संकट में फंसे देश के नागरिकों की मदद की. उन्होंने लोगों की देखभाल की, एम्बुलेंस लेकर गए, जरूरतमंदों को मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई की, बच्चों के लिए मदद कार्यक्रम चलाए, मृतकों का अंतिम संस्कार किया और संकट से निपटने में राज्य का पूर्ण सहयोग किया. 
मुझे खुशी है कि हम गुमनाम नायकों के प्रतिबद्धता भरे इस निस्वार्थ कार्य को पुरस्कृत कर रहे हैं.

हालांकि, हर अंधकार के बाद रोशनी आती है. भारत में लगातार 92 दिनों से रोजाना 50,000 से कम मामले सामने आए हैं, कल तो अपने देश में मात्र 26,727 नए कोरोना केस ही आए.  इसके अलावा, साप्ताहिक पॉजिटिविटी रेट, जो कि WHO की सिफारिश के अनुसार 5 प्रतिशत से कम रहना चाहिए, वो भारत में पिछले  94 दिनों से 3% से कम है. और दिल्ली में अब तीन महीने से लगातार 100 से कम पॉजिटिव केस आए हैं. 
 
इसका नतीजा ये हुआ कि अब देश के प्रमुख शहरों में कोविड के लिए बने अस्पतालों में बहुत कम ही बेड मरीजों से भरे हैं. केरल, जहां कि सबसे ज्यादा एक्टिव केस हैं, वहां अस्पतालों में भर्ती सभी लोगों में से केवल 4% में गंभीर लक्षण थे. 
अब लगता है कि कोरोना की दूसरी लहर को आखिरकार हमने पीछे छोड़ दिया है. लेकिन हम केवल अपनी रिस्क पर ही लापरवाह हो सकते हैं. हमें सोशल डिस्टेंसिंग के मानदंडों का पालन करने और मास्क लगाने की अपनी सुरक्षा को बनाए रखने की आवश्यकता है.
हमारे पास जश्न मनाने के लिए भी और भी बहुत कुछ है. भारत का वैक्सीनेशन कार्यक्रम कोरोना महामारी के खिलाफ दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण सक्सेस स्टोरी में से एक रहा है. 

एक धीमी शुरुआत के बाद, हमने दुनिया के सबसे व्यापक टीकाकरण अभियानों में से एक को शुरू किया है. 1 मार्च से, हमने कोरोना वैक्सीन की 90 करोड़ से ज्यादा खुराकें दी हैं. यह यूरोप की आबादी से भी ज्यादा है. 17 सितंबर को सिर्फ एक दिन में हमने पूरे देश में 2.5 करोड़ से अधिक लोगों को टीका लगाया. यह एक विश्व रिकॉर्ड है. 

विश्व स्तर पर टीकों का सबसे बड़ा निर्माता होने के अलावा, भारत ने दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन विकसित की है, जिसे 12 साल से ऊपर के सभी लोगों को दिया जा सकता है. प्रधानमंत्री ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा को इस बात की जानकारी दी है.
आदरणीय स्वास्थ्य मंत्री ने हमें हाल ही में बताया कि कैसे भारत का लक्ष्य इस महीने से कोरोना वैक्सीन के निर्यात को फिर से शुरू करना है, ताकि हम अपने ग्लोबल कमिटमेंट को पूरा कर सकें.
 
माननीय मंत्री जी, हमने ऑनलाइन पब्लिक नामांकन के माध्यम से हेल्थगीरी पुरस्कारों के विजेताओं को चुना है. सभी 18 कैटेगरी में से प्रत्येक के लिए पांच या छह नामों को चुना गया था. जूरी ने विजेताओं का चयन किया और एक स्वतंत्र रिसर्च एजेंसी, एमडीआरए द्वारा उनकी जांच की, उनका सत्यापन किया.

इस जूरी में मनीष सभरवाल, चेयरमैन, टीम लीज सर्विसेज लिमिटेड, डॉ श्रीनाथ रेड्डी, अध्यक्ष, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया, डॉ नरेश त्रेहन, चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर, मेदांता,  डॉ स्वाति पीरामल, वाइस चेयरपर्सन, पीरामल ग्रुप, और मैं स्वयं शामिल था. 
 मैं अपनी जूरी को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने इस काम के लिए समय निकाला. 

 मैं यहां यह बताना चाहता हूं कि हमने पिछले वर्ष सम्मानित हो चुके लोगों के नाम पर विचार नहीं किया, हालांकि उनका शानदार काम जारी है. 

मेरा मानना है कि आज के विजेता और हेल्थगीरी अवार्ड्स में भाग लेने वाली शख्सियतें ही न्यू इंडिया के सच्चे हीरो और असली चैंपियन हैं. 
ये हमारा सौभाग्य है कि हमें उनके उत्कृष्ट कार्य को सम्मान देने का मौका मिला. 

अब मैं माननीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया से आपका परिचय कराना चाहता हूं.
श्री मंडाविया गुजरात से राज्यसभा के सदस्य हैं और हमारे सबसे युवा कैबिनेट मंत्रियों में से एक हैं. उन्होंने 2016 में सड़क परिवहन और राजमार्ग, शिपिंग, रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली थी. 2019 में, उन्हें बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दिया गया था. उन्होंने पिछले साल जनवरी में स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच में भारत का प्रतिनिधित्व किया था. 
वे स्त्री स्वच्छता, महिला अधिकारों के प्रबल समर्थक हैं. उन्हें ‘सुविधा सेनेटरी नैपकिन’ की उनकी पहल के लिए Menstrual Hygiene Day पर यूनिसेफ ने  ‘Men for Menstruation’ से सम्मानित किया है. 
 
इस साल जुलाई में, उन्हें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री बनाया गया, जहां अन्य कार्यों के अलावा, उन्हें महामारी के खिलाफ सरकार की लड़ाई का नेतृत्व करना है. 

श्री मंडाविया में साइकलिंग को लेकर गजब का जुनून है, वह संसद तक साइकिल की सवारी करने वाले हमारे चुनिंदा राजनेताओं में से एक हैं. यह पूछे जाने पर कि वह ऐसा क्यों करते हैं, उन्होंने कहा, “यह उनके लिए एक जुनून है, फैशन नहीं”. मुझे पता है कि वह उसी जुनून के साथ अपनी नई जिम्मेदारियां निभाएंगे. 

उनकी कड़ी मेहनत और लोगों की सेवा करने के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए मेरा विश्वास है कि इस देश का ‘स्वास्थ्य’ अच्छे हाथों में है.
मैं माननीय मंत्री जी का हृदय से स्वागत करता हूं और उनसे मुख्य संबोधन देने का अनुरोध करता हूं.