Bamboo is green gold agricultural university is increasing yield through tissue culture read special story on 2021 World Bamboo Day

Publish Date: | Sat, 18 Sep 2021 11:22 AM (IST)

संदीप तिवारी, रायपुर। World Bamboo Day 2021: छत्तीसगढ़ में आने वाले दिनों में किसानों की आय का जरिया हरा बांस भी होगा। इसके लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने केंद्रीय वर्षा वन अनुसंधान केंद्र, असम से एमओयू कर बांस के बांस की उन्नत प्रजातियों को छत्तीसगढ़ में टिश्यू कल्चर के माध्यम से विकसित कर लिया है। सरकार किसानों से बांस की बड़े पैमाने पर खेती करवाने की योजना बना रखी है। किसानों को इसके लिए सब्सिडी भी दी जा रही है।

उद्यानिकी, वन विभाग और कृषि विभाग ने संयुक्त काम शुरू किया है। बांस की प्रमुख प्रजातियों में भालुका बांस, न्यूटंस बांस, जत्ती बांस, सुंदरकोंया बांस, देशी बांस को टिश्यू कल्चर के माध्यम से उगाया जा रहा है। अकेले रायपुर से 30 हजार बांस के पौधों को विकसित किया जा रहा है। उद्यानिकी, वन विभाग विभाग को 200 हेक्टेयर और कृषि विवि 86 हेक्टेयर में पहले चरण में बांस लगाना है। इससे किसानों को दोगुना आय होगी।

बताते हैं कि हरा बांस लगाने से किसानों को प्रति एकड़ डेढ़ से दो लाख रुपये आय होगी। कृषि विज्ञानियों का मानना है कि टिश्यू कल्चर के पौधे लगाकर किसान बांस उत्पादन करेंगे तो उन्हें बेहतर आमदनी प्राप्त होगी। उच्च गुणवत्तापूर्ण बांस के पौधे किसानों के लिए हरा सोना साबित होंगे।

इतने केंद्र हैं प्रदेशभर में विज्ञान केंद्र के

कृषि विवि के 27 कृषि विज्ञान केंद्र हैं। यहां से किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एमएन नागोरिया ने बताया कि बांस उगाने के लिए किसानों को कृषि विज्ञान केंद्रों में लाया जा रहा है। असम के साथ एमओयू हुआ है और इसकी प्रजाति के बांस बेहतर हैं।

उन्होंने बताया कि बांस का सामान अभी हमारे देश में बैंकाक, थाईलैंड और चीन से करोड़ों रुपये का आता है। सरकार चाहती है, तो यहां उत्पादन बढ़ेगा तो प्रदेश के किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

इसमें होता है बांस का इस्तेमाल

बांस का सबसे अधिक उपयोग कागज, अगरबत्ती की काडि़यां और चटाइयां बनाने में होती है। बम्बू बोर्ड भी आने लाती है। आदिवासी इलाकों में इसकी फैंसिंग भी बांस की ही होती है। बांस की प्रजातियां उत्तर पूर्व भारत में 110 मिलती है। छत्तीसगढ़ की जलवायु अनुकूल है। यहां कई प्रजातियां उग जाती हैं। पूरे हिंदुस्तान में बांस की 14 प्रजातियां हैं, जिनमें सात प्रजाति प्रदेश में उग सकती हैं। विवि में दो करोड़ रुपये खर्च करके टिश्यू कल्चर से बांस तैयार किया जा रहा है। रायपुर, धमतरी, कांकेर और कोंडगांव यहां प्रोडक्शन करेंगे। एक हेक्टेयर में बांस का क्षेत्र विकसित करना हैं। इसकी कटिंग से पौधे तैयार हैं।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और केंद्रीय वर्षा वन अनुसंधान केंद्र, असम के बीच एमओयू। बांस की प्रजातियों को विकसित कर रहा है इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय।

Posted By: Shashank.bajpai

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