ghaziabad news: Ghaziabad crime news: सिंगापुर में नौकरी लगवाने के नाम पर 80 हजार की ठगी, 9 महीने गाजियाबाद के थाने में दर्ज हुई रिपोर्ट – thugi in name of job in singapore ghaziabad police filled fir after 9 months

गाजियाबाद
सिंगापुर में नौकरी दिलवाने के नाम पर इंजीनियर के साथ ठगी का मामला सामने आया है। हैरानी की बात है इस मामले में साइबर सेल से मधुबन बापूधाम में आई पीड़ित की शिकायत फाइल ही गुम हो गई।

थाने और चौकी के चक्कर लगाने के बाद इंजीनियर को दोबारा शिकायत देनी पड़ी और वारदात के करीब 9 महीने बाद केस दर्ज किया गया है। सीओ कविनगर अंशु जैन ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज की गई है। फाइल गुम होने की बात बताई है, इसकी जांच की जाएगी।

विदेशी लोगों के साथ करवाए इंटरव्यू
जानकारी के अनुसार सूरजमल एन्क्लेव में रहने वाले पवन कुमार ने बताया कि वह मैकेनिकल इंजीनियर हैं। जनवरी में उनके पास मेल आई और सिंगापुर में जॉब ऑफर दिया गया। मेल पर जानकारी रिप्लाई करने के बाद उन्हें कॉल कर कॉन्टिनेंटल नाम की कंपनी में ऑपरेशन हेड की जॉब देने की बात की गई थी। जिसमें उन्हें भारतीय रुपये में 14 लाख 50 हजार रुपये प्रति महीने सैलरी की बात कही गई थी।

यह सारी बात उड़ीसा की एक कंपनी करवा रही थी। उनके तीन इंटरव्यू करवाए गए। जिसमें कुछ विदेशी लोग भी शामिल थे। जिसके बाद उन्हें लोगों पर विश्वास हुआ और उन्होंने जॉब के लिए 2 बार में 80 हजार रुपये दे दिए। ठगों ने उन्हें बताया कि प्राइवेट स्तर पर कुछ पेपर वर्क की फीस है। आरोप है कि रुपये लेने के बाद उनका नंबर बंद हो गया। उन्होंने फरवरी में इस मामले में मधुबन बापूधाम थाने में शिकायत की थी।

थाने से गायब हो गई शिकायत फाइल
पवन ने बताया कि इस मामले में उन्होंने फरवरी में मधुबन बापूधाम थाने में शिकायत दी थी। इसके बाद जांच के लिए वह साइबर सेल गया था। कुछ दिन बाद साइबर सेल गए तो जानकारी मिली थी उनकी शिकायत को थाने भेजा गया है। इसके बाद वह थाने और चौकी के चक्कर लगाते रहे, लेकिन कुछ हुआ नहीं। कुछ महीने के बाद एक पुलिसकर्मी ने बताया कि उनकी शिकायत की फाइल खो गई है। साथ ही उनसे दूसरी शिकायत मांगी गई। बाद में दूसरी शिकायत के देने के बाद बुधवार को मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई।

क्राइम की रफ्तार जितनी तेज थानों में कार्रवाई उतनी स्लो

साइबर बदमाश जितनी तेजी से लोगों की जेब काटते हैं, उनकी शिकायत दर्ज करवाने में पीड़ित को उतनी ही धीमी कार्रवाई से होकर गुजरना होगा। जिले में साइबर सेल के पास जाने वाले केस पर काम होता है, लेकिन ऐसे मामले जिसमें मुकदमा दर्ज होने की बात होती है, पीड़ित को थाने में और चौकी के चक्कर काटने पड़ते हैं। ऐसे में क्राइम के कई महीनों के बाद मुकदमा दर्ज किया जाता है।