How Many Religions In Afghanistan : Religions In Afghanistan Before Islam | How Many Religions In Afghanistan अफगान‍िस्‍तान का धार्मिक इतिहास यहां जान‍िए सबकुछ व‍िस्‍तार से… – Others








Thursday, October 7, 2021

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1/7अफगान‍िस्‍तान में 7 धर्मों की मान्‍यता

अफगान‍िस्‍तान का नाम सुनते ही जेहन में एक ही बात आती है क‍ि यह पूरी तरह से इस्‍लाम‍िक देश है। लेक‍िन ऐसा हरग‍िज नहीं है, क‍िसी वक्‍त में अफगान‍िस्‍तान एक-दो नहीं बल्कि 7धर्मों को मानने वाले देश था। मान्‍यता है क‍ि अफगान‍िस्‍तान के शुरूआती दौर में पारसी धर्म को खासी तरजीह म‍िली। तो आइए इत‍िहास के पन्‍नों में अफगान‍िस्‍तान के अतीत में दर्ज इन 7 धर्मों के बारे में इत‍िहास के जानकार सनोज द्विवेदी से व‍िस्‍तार से जान लेते हैं…. प्रस्‍तुत है इस व‍िषय पर प्र‍ियंका पांडेय की व‍िशेष र‍िपोर्ट:

2/7हिंदू धर्म

हिंदू धर्म की बात करें तो वह अफगान‍िस्‍तान में हमेशा से ही था। या यूं कहें क‍ि अफगान‍िस्‍तान हिंदू राष्‍ट्र ही था तो गलत नहीं होगा। फ‍िलहाल अफगानिस्तान में हिंदू सबसे बड़े धार्मिक अल्पसंख्यकों में से एक हैं। वहीं, 1800 से 800 ईसा पूर्व के बीच पार‍सी धर्म के अनुयायी अफगान‍िस्‍तान पहुंचे और फिर एक अरसे तक हिंदू और पारसी धर्म के लोग साथ-साथ रहे। अफगान‍िस्‍तान में पारसी धर्म के संस्थापक जरथुष्ट्र थे, जो क‍ि बल्ख़ में रहे और वहीं उनकी मृत्यु हो गई थी जबकि उस समय क्षेत्र को एरियाना के रूप में जाना जाता था। यही नहीं, यह वह समय था जब पारसी धर्म को काफी सशक्‍त धर्म माना गया।

3/7बौद्ध धर्म

3सौ ईसा पूर्व भारत आने से पहले कन‍िष्‍क ने अफगान‍िस्‍तान पर शासन क‍िया। उसके जीवन पर बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव था। यही वजह थी क‍ि वह जहां भी जाता वहां पर बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार करता रहता। इसका एक उदाहरण कश्‍मीर में भी देखने को म‍िलता है। जहां कुंडल वन में उसने चतुर्थ बौद्ध संगत‍ि का आयोजन करवाया था। इस संगत‍ि की अध्यक्षता वसुमित्र एवं अश्वघोष द्वारा की गयी थी। इसी परिषद में बौद्ध धर्म दो मतों में विभाजित हो गए –हीनयान एवं महायान। यही नहीं कन‍िष्‍क ने अफगान‍िस्‍तान में गांधार शैली में बनी हुई बौद्ध की तमाम प्रत‍िमाएं भी स्‍थाप‍ित करवाईं। बामियान शहर में बुद्ध की सबसे बड़ी मूर्तियों को चट्टान पर उकेरा गया था। हालांक‍ि उन्हें 2001 में नष्ट कर दिया गया था।

5/7ईसाई धर्म

अफगान‍िस्‍तान में 320ईसा पूर्व यूनानी आए। स‍िंकदर भी पहले अफगान‍िस्‍तान ही पहुंचा वह भी एक यूनानी ही था। यहीं से सेल्‍युकस ने भी चंद्रगुप्‍त पर हमला क‍िया। लेक‍िन इस धर्म को मानने वाले भी धीरे-धीरे अफगान‍िस्‍तान से पलायन करते चले गए। अफगान‍िस्‍तान में केवल एक मान्यता प्राप्त चर्च कैथोलिक चैपल है जो क‍ि इतालवी दूतावास में में है। इसमें स्‍थानीय न‍िवास‍ियों को जाने भी नहीं द‍िया जाता। कई स्रोतों का दावा है कि एक गुप्त भूमिगत चर्च भी है जिसे अफगान ईसाइयों ने बनाया है। अमेरिकी विदेश विभाग से प्राप्‍त आंकड़ों के अनुसार अनुमानित आकार में 500-8000 व्यक्ति अफगानिस्तान में रहते हैं।

6/7यहूदी धर्म

यहूदियों का निवास स्थान पारंपरिक रूप से पश्चिम एशिया में आज के इजरायल को माना जाता है जिसका जन्म 1947 के बाद हुआ। मध्यकाल में ये यूरोप के कई क्षेत्रों में रहने लगे जहां से उन्हें उन्नीसवीं सदी में निर्वासन झेलना पड़ा और धीरे-धीरे विस्थापित होकर वे कई जगहों पर गए। मान्‍यता है इसी दौरान वे अफगान‍िस्‍तान और भारत भी पहुंचे। अफगान‍िस्‍तान में इनका इत‍िहास 15सौ वर्ष से अध‍िक पुराना म‍िलता है। कहा जाता है क‍ि तकरीबन ढाई हजार साल पहले यहूदियों ने कारोबारियों और दक्षिणी फलस्तीन (जुडिया) से शरणा‌र्थियों के रूप में समंदर के रास्ते भारत आना शुरू किया था। उस दौरान कुछ यहूदी अफगान‍िस्‍तान में भी बसे। हालांक‍ि ऐसा दावा है क‍ि वर्तमान में अफगान‍िस्‍तान में एक भी यहूदी नहीं है।

7/7बहाई और स‍िख धर्म

बहाई धर्म की स्‍थापना बहाउल्‍लाह ने की थी। बहाई मतों के अनुसार दुनिया के सभी मानव धर्मों का एक ही मूल है। इसके अनुसार कई लोगों ने ईश्वर का संदेश इंसानों तक पहुंचाने के लिए नए धर्मों का प्रतिपादन किया जो उस समय और परिवेश के लिए जरूरी था। अफगान‍िस्‍तान में बहाई और स‍िख धर्म की बात करें तो मान्‍यता है क‍ि यहां नाम मात्र ही लोग थे। लेक‍िन ये दोनों धर्म भी अफगान‍िस्‍तान में माने जाने वाले धर्मों का हि‍स्‍सा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार वर्तमान में अफगान‍िस्‍तान में बहाई धर्म को मानने वाले लोगों की संख्‍या नगण्‍य बताई जाती है। वहीं स‍िख धर्म के लोगों की संख्‍या काबुल, जलालाबाद और कंधार को म‍िलाकर 120 पर‍िवारों के आस-पास बताई जाती है।

 

सनोज त्रिवेदी
इत‍िहास के जानकार
sanojtrivedi111@gmail.com