Is The Youth Moving Away From Indian Culture? – आपकी बात, क्या युवा वर्ग भारतीय संस्कृति से दूर होता जा रहा है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

सांस्कृतिक मूल्यों से दूर युवा वर्ग
भारतीय संस्कृति समूचे विश्व को आकर्षित करती है, लेकिन हम भारतीय ही अपनी संस्कृति से दूर होते जा रहें हैं। दिन प्रतिदिन हम पश्चात्य संस्कृति को अपनाते जा रहे हैं और हमारी संस्कृति सिर्फ पुस्तकों और कहानियों में ही कहीं गुम होती जा रही है। सबसे अहम है हमारे सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करना। त्याग, सम्मान, संयम, सत्य, अहिंसा, अध्यात्म ये सभी हमारी संस्कृति की पहचान रहे हैं। जहां हम कभी गर्व करते थे अपनी संस्कृति पर, वहीं आज का युवा वर्ग का मोह पश्चिमी संस्कृति की तरफ बढ़ता जा रहा है। रहन-सहन तो पूरी तरह बदल ही चुका है, अपने सिद्धान्तों और मूल्यों से भी दूरी बनानी शुरू कर दी है।
-नटेश्वर कमलेश, चांदामेटा, मध्यप्रदेश
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नहीं रहा अपनी संस्कृति से लगाव
युवा वर्ग पर पश्चिमी सभ्यता का अत्यधिक प्रभाव है। युवाओं में अपनी सभ्यता, संस्कृति और मान्यताओं से लगाव नहीं है। युवा वर्ग का गलत रास्तों पर जाना भी पश्चिमी सभ्यता के बढ़ते परिणाम का ही फल है। भारतीय समाज और युवा वर्ग पर यदि पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव इसी प्रकार बढ़ता रहा, तो भारतीय संस्कृति खतरे में पड़ सकती है। साथ ही पढ़ाई के प्रति उदासीनता भी बच्चों को गलत राह पर ले जाती हैं। युवाओं में भटकाव के पीछे एकल परिवार भी महत्त्वपूर्ण कारक है। आज दुनिया भौतिकतावादी हो गई है और लोगों की जरूरतें बढ़ती जा रही हैं। इसलिए उनके अंदर तनाव और फ्रस्टेशन बढ़ता जाता हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को अपनी संस्कृति से भी अवगत कराएं, ताकि उनको सही दिशा मिल सके।
-नरेंद्र रलिया, भोपालगढ़, जोधपुर
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अंग्रेजी माध्यम का दुष्परिणाम
अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा, घर से दूर रहकर पढ़ाई, बड़े शहरों और विदेश में जॉब की ललक, पाश्चात्य परिवेश की ओर झुकाव और मोबाइल ने युवाओं को भारतीय संस्कृति से दूर कर दिया है। टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले अधिकतर सीरियल भी पश्चिमी संस्कृति को पोषित-पल्लवित करते हैं, जिससे युवा पीढ़ी प्रभावित होती है। माता-पिता भी अच्छी नौकरी के चक्कर में बच्चों को अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में डाल देते हैं, जिससे वे भारतीय संस्कृति से दूर हो जाते हैं।
-राजेश सराफ, जबलपुर
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सांस्कृतिक विरासत को संभालने का समय
वैश्वीकरण और आधुनिकीकरण की चकाचौंध में युवा वर्ग हमारी पुरातन संस्कृति की महान विरासत को भूले जा रहा हैं। दूरियां इतनी बढ़ी हैं कि नैतिक मूल्यों का पतन होने लगा है, मानवता कराहने लगी है। आपसी सौहार्द, प्रेम और भाईचारे के पर्व फीके पड़ते जा रहे हैं। युवाओं की सोच दिखावे वाली बनती जा रही है। हमें याद रखना होगा कि नैतिकता, अपनत्व और देशभक्ति जैसे मूल्यों ने ही भारतीय संस्कृति को बनाए रखने में योगदान दिया है। युवा वर्ग का भारतीय संस्कृति से दूर होना देश के लिए कदापि उचित नहीं हो सकता। अत: हम हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
-भगवान प्रसाद गौड़, उदयपुर
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दिशाहीन होता जा रहा है समाज
आज की युवा पीढ़ी के आचार-व्यवहार पर नजर दौड़ाई जाए, तो यह कहना लाजिमी है कि आज का युवा भारतीय संस्कृति से दूर होता जा रहा है। धर्म के रीति-रिवाज, क्रियाकांड में नई पीढ़ी को कोई दिलचस्पी नहीं है और पाश्चात्य संस्कृति हावी होती जा रही है। समाज दिशाहीन हो रहा है, युवाओं को अतीत के प्रति कोई सम्मान नहीं है। विडंबना यह है कि भारत की युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति से विमुख हो रही है, वहीं विदेशियों में भारतीय संस्कृति का सम्मान करते के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है।
-रमेश कुमार लखारा, बोरुंदा, जोधपुर
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तकनीक ने किया दूर
कुछ हद तक ये कथन सत्य है कि युवा वर्ग हमारी संस्कृति से दूर होता जा रहा है। आज का युवा तकनीकी मोहमाया से भ्रमित है। वह सिर्फ अपने स्वयं की तरक्की पर केंद्रित रहता है। युवा वर्ग भारतीय संस्कृति की महत्ता को नहीं समझता है। इसके लिए उसके पास अनेक प्रकार के तर्क उपलब्ध होते हैं। युवा वर्ग को भारतीय संस्कृति से जोडऩे की कोशिश की जानी चाहिए।
-हिमांशु शर्मा, ब्यावर
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युवाओं पर दोषारोपण ठीक नहीं
युवा के मन में भारतीय संस्कृति एवं परंपराओ को लेकर एक आदर्श छवि बनी हुई ह, लेकिन जब वह वास्तविकता के धरातल पर स्थितियों को बहुत बदला हुआ पाता है तो जाने-अनजाने में अपनी संस्कृति से दूर होता चला जाता है । इसलिए युवा पीढ़ी पर पूरी तरह से दोषारोपण करना उचित नहीं है। अपनी महान संस्कृति से परिचित करवाने एवं युवा पीढ़ी को पथ प्रदर्शित करने की जिम्मेदारी हम सभी की है।
-भारती जैन, महारानी फार्म जयपुर
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युवा वर्ग को समझाने की जरूरत
युवा पीढ़ी अपने आपको मॉडर्न बनाने की चाह में पाश्चाात्य संस्कृति को अपनाती जा रही है। अपने आपको आधुनिक बताने के चक्कर में भारतीय संस्कृति को पिछड़ी सोच का तमगा देते जा रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि आज के युवाओं को भारतीय संस्कृति से जुड़ी हुई प्रेरणादायक किताबों से रूबरू करवाया जाए, ताकि युवा पीढ़ी उसे भारतीय संस्कृति के महत्त्व का पता चल सके। तब उसे यह समझ में आएगा कि भारतीय संस्कृति पिछड़ी सोच पर आधारित नहीं है। हर बात का वैज्ञानिक कारण है।
-सोनिका कमलेश हिड़ाऊ, बैतूल, मध्यप्रदेश
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सही दिशा देने की जरूरत
युवाओं को अपनी संस्कृति और सभ्यता के बारे में जानकारी हो, इसके लिए परिवार के स्तर पर ही प्रयास जरूरी है। माता-पिता अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति के बारे में सही जानकारी दें। समाज को भी इस दिशा में आवश्यक पहल करनी चाहिए। जो युवा अपनी राह भटक गए हैं, उनको सही दिशा देने का प्रयास किया जाए। उन्हें भारतीय संस्कृति की सही जानकारी दी जाए, तो निश्चित ही इसका सकारात्मक असर होगा।
-आलोक वालिम्बे, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
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बचपन से ही अच्छे संस्कार डालें
बाल्यावस्था से ही परिवार में बच्चों को अच्छे संस्कार और मानवीय मूल्यों की शिक्षा दी जानी चाहिए। उनके अनुचित व्यवहार को नजरअंदाज ना करके उन्हें समझाना चाहिए, ताकि उनकी छोटी गलतियां भविष्य में अपराध का रूप ना ले सकें। साथ ही आसपास की संदिग्ध गतिविधियों के प्रति सामाजिक जागरूकता और सजगता के द्वारा निरंतर हो रहे अपराधों को रोका जा सकता है।
-निष्ठा टहिलयानी, जयपुर
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विवेकानंद को बनाएं आदर्श
युवा अपनी संस्कृति से दूर जा रहे हैं। इसी वजह से अपराध भी बढ़ रहे हैं। आज का युवा एक विदेशी संस्कृति से ज्यादा प्रभावित है। उसकी नजर में मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषा का महत्त्व नहीं है। वह अंग्रेजी को ही महत्त्व दे रहा है। बेहतर तो यह है कि हर युवा स्वामी विवेकानंद को आदर्श मानकर आगे बढ़े।
-मनोहर सिंह सोढा, बालोतरा
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युवा वर्ग की जिम्मेदारी
यह बात सही है कि युवा वर्ग भारतीय संस्कृति से धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है। आज का युवावर्ग पाश्चात्य संस्कृति की नकल कर अपनी मूल भारतीय संस्कृति से विमुख होता जा रहा है, जो कि गंभीर चिंता की बात है। भारत ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर की बदौलत ही विश्व में अपनी एक अलग पहचान बना रखी है। इस पहचान को बनाए रखने की जिम्मेदारी युवा वर्ग की है। देश के युवा बेशक इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में आगे बढ़ें, लेकिन अपनी संस्कृति को हमेशा जिंदा रखें।
-सूर्यपालसिह चामुंडेरी, पाली
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जाल में फंस गया युवा वर्ग
भारतीय संस्कृति विश्व की सभी संस्कृतियों में सर्वश्रेष्ठ है। यहां पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों, जल-जमीन को भी देवी-देवताओं के रूप में पूजा जाता है। वर्तमान में पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण, पोर्नसाइट के मकडज़ाल, वेबशोज में अश्लील दृश्यों व गंदी गालियों की भरमार ने युवा वर्ग को इस प्रकार अपने जाल में फंसाया है कि वह चाहकर भी इनसे निकल नहीं पा रहा है।
-नरेन्द्रसिंह चौहान, धुलकोट बुरहानपुर