Madhya Pradesh Crime News The name of the former dean of Mumbai college in cheating in the name of admission in medical college

Publish Date: | Fri, 01 Oct 2021 06:14 PM (IST)

Madhya Pradesh Crime News: भोपाल (राज्य ब्यूरो)। मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिलाने के नाम पर ठगी करने के आरोपितों के संबंध मुंबई के एक मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन से भी रहे हैं। यह पूर्व डीन एक मामले में पहले से स्थानीय पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है। अब मध्य प्रदेश एसटीएफ इसे गिरफ्तार कर ठगी के रैकेट के संबंध में जानकारी जुटाएगी। गिरफ्तार आरोपितों से मिली जानकारी के आधार पर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश में ठगों का सहयोग करने वालों को चिन्हित कर लिया गया है। जल्द ही इन्हें पकड़ने के लिए टीम निर्धारित स्थानों पर जाएगी।

मालूम हो, नीट की परीक्षा देने वाले रीवा निवासी एक छात्र से 36 लाख स्र्पये यह कहकर ठगे गए थे कि उसका प्रवेश सेंट्रल पूल कोटे से मेडिकल कॉलेज में करा दिया जाएगा। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) भोपाल ने शिकायत के आधार पर भोपाल निवासी संदीप करवरिया और पूर्णिया (बिहार) निवासी दीपक कुमार को गिरफ्तार किया था। इस मामले में पटना निवासी देवराज मिश्रा और आगरा निवासी अजीत प्रताप सिंह भी आरोपित हैं। सूत्रों का कहना है कि आरोपितों के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत अधिकारियों से संबंध की जानकारी मिली है। इसमें मुंबई के लोकमान्य तिलक मेडिकल कॉलेज के डीन रहे डॉ. राकेश का नाम सामने आया है। राकेश एक अन्य मामले में पुलिस की गिरफ्त में है। भोपाल एसटीएफ की टीम उसे गिरफ्तार करने की तैयारी में है।

कई विद्यार्थियों को कॉलेज तक घुमा लाए

आरोपितों का उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में नेटवर्क है। यह लोग परीक्षा केंद्रों के बाहर खड़े रहते थे और किसी बहाने विद्यार्थियों से संपर्क कर उनका प्रवेश मेडिकल कॉलेजों में कराने का झांसा देते थे। कई विद्यार्थियों को यह लोग कॉलेजों तक घुमा लाए और वहां के अधिकारियों से भी मुलाकात कराई। सूत्रों का यह भी कहना है कि आरोपितों ने उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में अपने सहयोगियों के बारे में जानकारी दी है। इनके संबंध में एसटीएफ पड़ताल कर चुकी है। शीघ्र ही इनकी भी गिरफ्तारी की जाएगी।

ऑनलाइन बिक रहा डेटा

आरोपितों ने यह भी बताया है कि परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों का डेटा ऑनलाइन बिक रहा है। यह खरीद उसी तरह होती है, जैसे कोई विज्ञापन एजेंसी अपने उत्पाद के प्रचार के लिए उपभोक्ताओं की जानकारी जुटाकर फोन और एसएमएस के माध्यम से प्रचार करती है। इस प्रकार के डेटा बेचने वालों पर भी जांच एजेंसी की नजर है।

इनका कहना है

आरोपितों से पूछताछ में कई जानकारी सामने आई है। उनके सहयोगियों के साथ एक कॉलेज के एक अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध है। जांच जारी है। जल्द ही आगे की कार्रवाई करेंगे।

नवीन चौधरी, पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ भोपाल

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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