MP Arts and Culture Agaria tribe made hammer after seeing the beak of woodpecker

Publish Date: | Sat, 11 Sep 2021 02:18 PM (IST)

MP Arts and Culture: भोपाल(नवदुनिया रिपोर्टर)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय द्वारा अपनी ऑनलाइन प्रदर्शनी श्रृंखला के पैसठवें सोपान के तहत मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी से अगरिया जनजाति का उत्पत्ति मिथक की जानकारी को इससे संबंधित छायाचित्रों एवं वीडियो के साथ प्रस्तुत किया गया है। प्रागैतिहासिक काल में दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पत्थर के औजार और आग की खोज की गई थी। समय बीतने के साथ पहिया और धातु के औजारों के आविष्कार ने मानव जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए और लोहे की खोज मील का पत्थर साबित हुई। प्राचीन साहित्य में लोहा गलाने और इस पेशे से जुड़े लोगों का उल्लेख मिलता है। अगरिया जनजाति उन में से एक है जो पारंपरिक तरीके से लोहा पिघलाने का काम करते थे। यह जनजाति मुख्य रूप से मध्यप्रदेश के मंडला, डिंडोरी, बालाघाट और सीधी जिले और छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, राजगढ़ एवं कवर्धा जिलों के आसपास के क्षेत्र में निवास करती है। अगरिया मध्यप्रदेश की एकमात्र ऐसी जनजाति है, जिसने प्राचीन काल से पत्थर-लोहे के खनन का काम किया है तथा ये लोग लोहे के औजारों का निर्माण भी करते थे। कुछ अगरिया लोग अभी भी लोहे को गलाने के अपने पारंपरिक व्यवसाय करते हैं शेष खेती के औजार बनाने का काम ही करते हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में इस जनजाति की कला को मिथक ऑनलाइन प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया गया है। मैकाल पर्वत श्रृंखला से वे गहरे लाल रंग के पत्थर का चयन करके लौह अयस्क प्राप्त करते हैं। पहले यह माना जाता था कि अगरिया के लोगों के पास औजार नहीं होते थे। वे लोहे का सारा काम अपने हाथों से ही करते थे और यह बहुत कष्टकारी था। मिथक है कि एक दिन अगरिया अपनी परेशानियों के बारे में बताने भगवान के पास पहुंचे। भगवान की कृपा से और अपनी बुद्धि एवं कौशल का उपयोग करके रास्ते में बैठे कुत्ते के पैरों को देख संड़सी बनाने, कढ़फोड़वा की चोंच देख हथौड़ा बनाने की प्रेरणा मिली। उसी दिन से वे औजारों का प्रयोग करने लगे। मंडला के रामजी राम अगरिया और पंकूराम अगरिया द्वारा इस पूरी सृष्टि की कहानी को एक लोहे के फलक के रूप में दर्शाया गया है। इस विशाल लोहे के फलक की समग्र संरचना अगरिया द्वारा बनाए गए पारंपरिक लैंप के समान है, जहां दीयों के साथ ही वनस्पतियों और जीवों की एक विशाल विविधता को भी चित्रित किया गया है।

Posted By: Lalit Katariya

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